गुरु के प्रति भावना नहीं श्रद्धा बढ़ाएं : डॉ वसंतविजयजी म. सा.


"देव, गुरु एवं धर्म का हर व्यक्ति के जीवन में महत्व है"



राष्ट्रसंतश्रीजी ने उज्जैन से इंदौर की ओर किया विहार 



उज्जैन/इंदौर। तमिलनाडु प्रांत के विश्वविख्यात तीर्थ धाम श्रीकृष्णगिरी पार्श्वपद्मावती शक्ति पीठ के पीठाधीश्वर डॉ वसंतविजयजी महाराज साहब ने शनिवार अलसुबह उज्जैन से विहार कर इंदौर पहुंच गए, जहां के गुरुभक्त मंडल के अनेक सदस्यों ने उनका फूटी कोठी चौराहा स्थित श्रीजी वाटिका में गुरुभक्त रितेश नाहर के साथ अनेक श्रद्धालुओं ने अगवानी करते हुए स्वागत सत्कार किया। संतश्रीजी द्वारा मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के दस्तूर गार्डन में रविवार को पहली बार महालक्ष्मीजी के 1008 नामों व लक्ष्मी कवच वाचन के साथ महामांगलिक का कार्यक्रम दोपहर 1:30 बजे से होगा। इस कार्यक्रम में सर्वधर्म व समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया है। यहां पहुंचने के बाद अपने संक्षिप्त अमृतमयी संदेश में उन्होंने कहा कि भावना शाश्वत नहीं है, भावनाओं से बनी चीजें कभी शाश्वत नहीं होती। संबंध भी भावना का नहीं होना चाहिए। भावना की जगह श्रद्धा बढ़ाएं, श्रद्धा से शाश्वतता बनी रहेगी। उन्होंने गुरु की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए "गुरु श्रद्धा से भी ऊंचे हैं यह बात जमाना क्या जाने.. पंक्तियों के साथ कहा कि इस जगत में परमपिता परमात्मा से बड़ा कोई नहीं है। लेकिन गुरु का हृदय में सदैव स्थान देना चाहिए तथा उन्हें श्रद्धा का विषय बना कर ही भक्ति करनी चाहिए। वह बोले कि देव, गुरु और धर्म का महत्व हर व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण ही नहीं आवश्यक है। उपस्थित श्रद्धालुओं को नकारात्मकता को त्यागने व सकारात्मक सोच के साथ प्रगति पथ पर बढ़ने का मांगलिक आशीर्वाद देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि श्रेष्ठतम जीवन एवं उन्नतिपरक जीवन के लिए शुभ दृष्टि रखनी चाहिए। इस अवसर पर प्रकाश तल्लेरा, शैलेंद्र तल्लेरा, उमंग कोठारी, राजेंद्र राठौड़, गजेंद्र कोठारी व विकी बागरेचा सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।



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