पाली के एएसपी रामेश्वर लाल मेघवाल के दूध वाले को रोकने पर कांस्टेबल संदीप लाइन हाजिर, मेघवाल का अश्लील गालियों से भरा ऑडियो वायरल! तो फिर कोरोना योद्धा कैसे देंगे ड्यूटी?

न्यूजडेस्क। सब जानते हैं कि कोरोना वायरस के प्रकोप के मददेनजर कफ्र्यू और लॉकडाउन की क्रियान्विति में पुलिस का कांस्टेबल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भीषण गर्मी में भी कांस्टेबल चौराहे पर किसी गली के नुक्कड़ पर खड़ा होकर अपनी ड्यूटी दे रहा है, इसलिए चिकित्सा कर्मियों के साथ साथ पुलिस के जवानों को भी कोरोना योद्धा माना गया है। लेकिन इसके उलट राजस्थान के पाली में कांस्टेबल संदीप को बेवजह लाइन हाजिर होना पड़ा है। पुलिस के अफसरों की एकजुटता की वजह से कांस्टेबल को विभागीय जांच का भी सामना करना पड़ रहा है। सदीप का कसूर इतना ही है कि एक मई को पाली के सूरज पोल चौराहे पर ड्यूटी के दौरान उसने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामेश्वर लाल मेघवाल के दूधवाले को रोक दिया था। कांस्टेबल संदीप का कहना है कि एसडीएम रोहिताश (आईएएस) ने तीस अप्रैल को आदेश निकाल कर जीरो मोबिलिटी वाले क्षेत्र में आवागमन पर रोक दिया था। यहां तक लॉकडाउन के पास भी निरस्त कर दिए थे। अकेले एएसपी के दूध वाले को नहीं रोका गया, बल्कि अन्य दूध वाले भी रुके रहे। संदीप के साथ एक मई को सुबह सात बजे ट्रेफिक पुलिस के एएसआई पेमाराम भी ड्यूटी पर थे। जिस वक्त दूधवाले को रोका गया, तब ट्रेफिक इंचार्ज गीता सिंह भी अपनी जीप में बैठी थी। गीता सिंह के साथ कांस्टेबल आलोक, भागीरथ और ड्राइवर वीरेन्द्र भी थे। जीप से ही लोगों को वापस लौटने की हिदायत दी जा रही थी। संदीप अपनी ड्यूटी निभाई रहा था कि एएसपी मेघवाल का संदेश आ गया। इस संदेश में एएसआई पेमाराम और कांस्टेबल संदीप को एएसपी के सरकारी बंगले पर तुरंत बुलाया गया। संदीप को देखते ही एएसपी मेघवाल आग बबूल हो गए। एएसपी ने इस बात पर गुस्सा जताया कि एक कांस्टेबल ने उनके दूध वाले को रोक दिया है। कांस्टेबल संदीप और एएसपी मेघवाल के बीच जो संवाद हुआ उसका ऑडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। संदीप का दावा है कि एएसपी ने उसे मारने का भी प्रयास किया। अश्लील गालियां तो ऑडियो में सुनी जा सकती है। अश्लील गालियों से भरे इस ऑडियो को सुनने के बाद अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस के कुछ बड़े अधिकारी एक कांस्टेबल से कैसा व्यवहार करते हैं। हालांकि कांस्टेबल ने माफी भी मांगी, लेकिन एएसपी ने संदीप को तत्काल लाइन हाजिर कर दिया। संदीप को उम्मीद थी कि पाली के पुलिस अधीक्षक राहुल कोटोकी उसकी पीड़ा को समझेंगे, इसलिए वह एसपी के समक्ष भी उपस्थित हुआ, लेकिन दो मई को संदीप के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कर दी गई। विभागीय जांच की कार्यवाही से संदीप का धैर्य टूट गया और उसके गालियों से भरा ऑडियो पुलिस के बड़े अधिकारियों को भेज दिया। अब संदीप पीछे नहीं हटना चाहता है। संदीप का कहना है कि एक मई को सूरजपोल चौराहे पर ट्रेफिक इंचार्ज  और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे, तब दूधवाले को रोकने की सजा अकेले ही उसे क्यों दी जा रही है। कोरोना प्रकोप के मद्देनजर कोरोना योद्धाओं पर भारतीय सेना फूल बरसा रही है, लेकिन पाली में मेरे जैसे कोरोना योद्धा को बेवजह प्रताडि़त किया जा रहा है। कांस्टेबल संदीप की हिम्मत का अंदाजा अब इसी से लगाया जा सकता है कि वह इस बात को स्वीकार कर रहा है कि उसने ही बंगले पर एससपी मेघवाल की गालियों का ऑडियो अपने मोबाइल से बनाया है। संदीप का कहना है कि 12 वर्ष की पुलिस सेवा में उसने कभी भी एक रुपए की रिश्वत नहीं ली। ईमानदारी से ड्यूटी करने के बाद भी मां बहन की गालियां सुनने को मिले तो फिर ऐसी नौकरी का क्या फायदा। संदीप को उम्मीद है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उसकी पीड़ा को समझेंगे और न्याय दिलवाएंगे। 


ऑडियो की जानकारी नहीं-मेघवाल:


वहीं पाली के एएसपी रामेश्वरलाल मेघवाल ने कहा कि उन्हें गालियों वाले ऑडियो की कोई जानकारी नहीं है। अलबत्ता कांस्टेबल संदीप के विरुद्ध एक दूधवाले और होमगार्ड ने लिखित में शिकायत की है। इसलिए विभागीय जांच करवाई जा रही है। 
(साभार : एस.पी.मित्तल)